ज़िंदगी में कुछ तो मिला चन्द उलझने ही सही कोई न जान पाया कि ज़िन्दगी के परे क्या है॥
.. गोपाल कृष्ण शुक्ल
सुकून की तलाश है सब को एक हलचल सी है जहान में।
तूने कभी करीब से खुद को नहीं देखा देख जरा ये ज़िंदगी कितनी हसीन है।
यादों मे रह जाते हैं वो जिन्दा जिन लम्हों को वक्त निगलता है।