Friday, September 16, 2022

{९२७}




हुई राहे-जीस्त मुश्किल तो क्या 
हर कदम पर कायम हौसला रख। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{९२६}




ज़िंदगी में कुछ तो मिला चन्द उलझने ही सही 
कोई न जान पाया कि ज़िन्दगी के परे क्या है॥ 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

Thursday, September 15, 2022

{९२५}




सुकून की तलाश है सब को 
एक हलचल सी है जहान में। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{९२४ }




कोई थमा दे वही पुराना किताबों का बस्ता 
बचपन के वो दिन कितने ही खुशनुमा थे। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{९२३ }




तूने कभी करीब से खुद को नहीं देखा 
देख जरा ये ज़िंदगी कितनी हसीन है। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल  

{९२२}




गम न कर ओ मुसाफिर शहर छूट जाने का 
अगले शहर मे जरूर तेरा आशियाना होगा। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{९२१}




यादों मे रह जाते हैं वो जिन्दा
जिन लम्हों को वक्त निगलता है। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल