Sunday, September 18, 2022

{९३२ }




लाख रहे शहरों में फिर भी अंदर से देहाती हूँ 
दिल भी थोड़ा बच्चा है औ' थोड़ा जज्बाती हूँ। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{९३१ }





वक्त करता हर बार कुछ फैसले 
वक्त को हर बार देखा जाएगा। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{९३०}




जमाने में खुद को बिखरने मत दो 
यादें खलल डालती ही हैं सुकून में। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

Saturday, September 17, 2022

{९२९ }




शब्द ढूँढता रहा मुझे शिल्प के लिए 
मैं स्वप्न में डूब कल्पनाएं बांधता रहा। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{९२८}




लौट आते हैं घोंसलों में परिंदे भी शाम तक 
आसमान पर कोई भी ठहरा नही करता। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

Friday, September 16, 2022

{९२७}




हुई राहे-जीस्त मुश्किल तो क्या 
हर कदम पर कायम हौसला रख। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{९२६}




ज़िंदगी में कुछ तो मिला चन्द उलझने ही सही 
कोई न जान पाया कि ज़िन्दगी के परे क्या है॥ 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल