Monday, September 19, 2022

{९३४ }




पढ़ सके कोई तो हमें पढ़ ले 
हम एक मुक्कमल किताब हैं। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{९३३ }




यादों का भरोसा क्या
कब आगोश में ले लें 
यादों की किस्मत में 
आराम नहीं होता।। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

Sunday, September 18, 2022

{९३२ }




लाख रहे शहरों में फिर भी अंदर से देहाती हूँ 
दिल भी थोड़ा बच्चा है औ' थोड़ा जज्बाती हूँ। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{९३१ }





वक्त करता हर बार कुछ फैसले 
वक्त को हर बार देखा जाएगा। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{९३०}




जमाने में खुद को बिखरने मत दो 
यादें खलल डालती ही हैं सुकून में। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

Saturday, September 17, 2022

{९२९ }




शब्द ढूँढता रहा मुझे शिल्प के लिए 
मैं स्वप्न में डूब कल्पनाएं बांधता रहा। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{९२८}




लौट आते हैं घोंसलों में परिंदे भी शाम तक 
आसमान पर कोई भी ठहरा नही करता। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल