पढ़ सके कोई तो हमें पढ़ ले हम एक मुक्कमल किताब हैं।
.. गोपाल कृष्ण शुक्ल
यादों का भरोसा क्याकब आगोश में ले लें यादों की किस्मत में आराम नहीं होता।।
लाख रहे शहरों में फिर भी अंदर से देहाती हूँ दिल भी थोड़ा बच्चा है औ' थोड़ा जज्बाती हूँ।
वक्त करता हर बार कुछ फैसले वक्त को हर बार देखा जाएगा।
जमाने में खुद को बिखरने मत दो यादें खलल डालती ही हैं सुकून में।
शब्द ढूँढता रहा मुझे शिल्प के लिए मैं स्वप्न में डूब कल्पनाएं बांधता रहा।