Thursday, September 15, 2022

{९२५}




सुकून की तलाश है सब को 
एक हलचल सी है जहान में। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{९२४ }




कोई थमा दे वही पुराना किताबों का बस्ता 
बचपन के वो दिन कितने ही खुशनुमा थे। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{९२३ }




तूने कभी करीब से खुद को नहीं देखा 
देख जरा ये ज़िंदगी कितनी हसीन है। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल  

{९२२}




गम न कर ओ मुसाफिर शहर छूट जाने का 
अगले शहर मे जरूर तेरा आशियाना होगा। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{९२१}




यादों मे रह जाते हैं वो जिन्दा
जिन लम्हों को वक्त निगलता है। 

.. गोपाल कृष्ण शुक्ल

Friday, July 3, 2015

{ ९२० } {April 2015}





अब कहीं और कोई शरारत हो न जाये
मौला को इसाँ से शिकायत हो न जाये
छोड़ दे अपनी जालिमाना हरकतें अब
कहीं ये धरती ही नदारत हो न जाये।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ९१९ } {April 2015}





सूनसान हैं फ़िज़ायें मौसम उदास है
दूर है मेरी गज़ल इन्तज़ार पास है
कोई जा कर कह दे मेरी नाजनीं को
टूटी नहीं अभी मिलन की आस है।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल