वो कहीं आस-पास मौजूद है
हू-ब-हू ये परछाईं उसी की है।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
मुझको पता है कि मुझको मयस्सर नहीं खुशियाँ,
इसीलिए मैंने खुद को सुपुर्दे-शबे-ग़म कर दिया।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
तेरी खुद्दारीयों पर हमको रहेगा फ़क्र तमाम उम्र
भूल न पाएंगें तेरी शाही मे फकीराना अन्दाज़ को।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
ब्रह्म सत्य है केवल, बाकी जग सब मिथ्या पाया,
ब्रह्म-स्वरूप जीव को हर पल नचा रही है माया।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल