पल्लव
Monday, February 18, 2013
{ ४७७ } {Feb 2013}
किसी का भी आसरा करके मिला क्या
खुद से खुद को घटा करके मिला क्या
खार सहेजे गुलशन में, गुलबिखराये
ज़िंदगी तुझे झुठला करके मिला क्या।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
Sunday, February 17, 2013
{ ४७६ } {Feb 2013}
खनकी पायल संकेतों की
मेरे ख्वाबों की कलियों में
कर सोलह सिंगार बसी हो
मेरे गीतों की गलियों में।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{ ४७५ } {Feb 2013}
आप मुस्कुरायें तो जी बहल जाये
ये अनबन की आग भी ढल जाये
आओ बैठो बात करें मोहब्बत की
गम का वातावरण भी बदल जाये।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{ ४७४ } {Feb 2013}
राग की इस रागिनी ने
साज छेडा जब तुम्हारा
झँकृत हुआ सारा बदन
मन है हरपल तुम्हारा।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{ ४७३ } {Feb 2013}
आज अपना साया ही जब अजनबी हुआ
वो इश्क भी बीते कल की कहानियाँ हुईं
मोहब्बत में हमको और मिलता भी क्या
हुस्न की इश्क पर कब मेहरबानियाँ हुईं।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{ ४७२ } {Feb 2013}
अपने रिश्ते - नातों के बंधन धागे टूट गये
स्नेहिल सँगी - साथी भी सब पीछे छूट गये
जब भी आँखें करती रहतीं अश्कों की बारिश
लगता जैसे दुखती यादों के बादल फ़ूट गये।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{ ४७१ } {Feb 2013}
खुद को पहचाना है हमने
हम नही हैं वक्त के मारे
जीवन हमसे ही जीता है
हम जीवन के नही सहारे।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
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