पल्लव
Friday, July 3, 2015
{ ९१८ } {April 2015}
हम जहाँ सर झुका कर बैठ गये
आप वहीं पास आकर बैठ गये
राहे - मोहब्बत में क्या बतायें
आप से दिल लगाकर बैठ गये।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{ ९१७ } {April 2015}
बाट जोह रही पिया की, मैं तड़पूँगी वो तड़पायेगा
चाँद आसमाँ से आकर जब दरीचे में रुक जायेगा।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
Wednesday, July 1, 2015
{ ९१६ } {April 2015}
खुदा की रहमत है ये ज़िन्दगी यूँ ही जिये जा
अच्छे-बुरे की पहचान तो जमाना कराता है।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{ ९१५ } {April 2015}
राह मुश्किल थी मगर अब आसान हो गई
अजनबियों के शहर से अब पहचान हो गई।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
Monday, June 29, 2015
{ ९१४ } {April 2015}
गमों में मुस्कुराती खुशियों में खुश नहीं होती
अजीब मंजर दिखलाया करती है ये ज़िन्दगी।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{९१३} {April 2015}
कल तक उसपर भी था एतबार बहुत
आज खुद से भी मैं होशियार रहता हूँ।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{९१२} {April 2015}
हँस-हँस के जी रहा हूँ मगर जरा मेरे दिल से पूछो
कैसे ढ़ो रहा हूँ वो गमों-सितम जो अपनों ने दिये हैं।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
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