उठता एक सवाल जेहन में बार-बार क्यों है
हर शख्स को होती प्यार की दरकार क्यों है
तनहाइयों में घबराया करता दिल हमारा भी
प्यार में ही मिलता सभी को करार क्यों है।।
ये कौन मन-उपवन से चुपके-चुपके गा रहा है
प्यार से तपते कपोल मन्द-मन्द सहला रहा है
मधुर. छुअन, मोहक. अँग - रँग, कोमल. अँग
प्रीति. चँदन. सुवासित. गँध. से महका. रहा है।।
देखता हूँ. जब तुमको. दिल को. सुकून. मिल. जाता है
मेरे गीतों को. गज़लों को. नया मजमून. मिल जाता है
तस्सवुर. में निहारता हूँ. जब भी. तेरे जमाले हुस्न को
बेचैनियों से भरे मेरे दिल को चैनो-जुनून मिल जाता है।।