पल्लव
Monday, August 20, 2012
{ ३१८ } {Aug 2012}
हमदर्दी, मेंहँदी की प्रीत बन गयी
स्वेद-गँध, जूडे का गीत बन गयी
कैसे बहलाए मन, सिल कर घाव
पीडा, क्षमताओं की मीत बन गयी।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{ ३१७ } {Aug 2012}
कोई हमदम नही, दोस्त नही, हमराज नही
अपना गम किससे कहूँ कोई हमनवाज नही
खो गई जाने कहाँ, दिल के धदकनों की सदा
मेरी आवाज मे शामिल, मेरी आवाज नही।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{ ३१६ } {Aug 2012}
मोहब्बत को दिल में जगा के देखो
मुझे अपनी मोहब्बत बना के देखो
हम गुजरे हुए कल के सपने नही है
जरा दिल से दिल को लगा के देखो।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
Sunday, August 19, 2012
{ ३१५ } {Aug 2012}
दिल-ओ-जाँ निसार है तुम पर
मुझको पूरा एतबार है तुम पर
तू बस हाँ कह दे चैन से जी लूँ
मेरा सब्र-ओ-करार है तुम पर।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{ ३१४ } {Aug 2012}
मन पंछी उडता फ़िरता कभी गगन-गगन
मन पंछी रमता-बसता कभी वन-उपवन
मन पंछी कब रह पाया मानुष के वश मे
रूठे कभी पिया से चाहे कबी पिया मिलन।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
Saturday, August 18, 2012
{ ३१३ } {Aug 2012}
इश्क ने भेजे हैं हसीन पयाम आपके लिये
दिल ने भेजे हैं लाखों सलाम आपके लिये
हैरत है देखकर आपकी आँखों की तिश्नगी
आ जाइये हाजिर है ये गुलाम आपके लिये।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{ ३१२ } {Aug 2012}
खुदा का नूर हो, दिखती जन्नत की हूर हो
दिल की सदा है यही तुम्ही चश-ए-बद्दूर हो
फ़ीकी हर मिसाल तुम जहाँ में हो बेमिसाल
अब हो रहा एहसास, कि तुम्ही मेरे गुरूर हो।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
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