Friday, December 21, 2012

{ ४०९ } {Dec 2012}





एक दीप और जले।
चीर अँधकार उजास भर चले।।

भावना निराश हो नहीं
कामना हताश हो नहीं
हृदय उदास हो नहीं
शिथिल प्रयास हो नहीं।।

तूफ़ान में दीप जले।
एक दीप और जले।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ४०८ } {Dec 2012}





रोज ही होती यहाँगैरतों की मलामत
निकल जाओ बेदाग यही है गनीमत
दबा है ईमान चाँदी के जूतों के नीचे
फ़कत बेईमानों की ऊंची हुई कीमत।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ४०७ } {Dec 2012}





अभिनन्दन दीपमालिके !!

आशा विश्वासवती हो
साधना सुहागवती हो
साधक को सह सिद्धि दे
जगमग ज्योतित सुमालिके

अभिनन्दन दीपमालिके !!

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

Sunday, November 18, 2012

{ ४०६ } {Nov 2012}





जाग उठी मन की तरुणाई
अब न कटे ये दूरी तनहाई
बाहों में तुम मुझको भर लो
महक उठी है सारी अमराई।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ४०५ } {Nov 2012}






संत सुख को भी नहीं समझते हैं
और दुख को भी नहीं समझते हैं
इस जग ने समझा कुछ उन्हे ही
जो जग को कुछ नही समझते हैं।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ४०४ } {Nov 2012}





लफ़्ज़ मेरे जुबाँ पे आते-आते
जाने क्यों हैं रुक-रुक से जाते
जब इसके रिश्ते तुमसे हैं गहरे
मौन मधुर स्वर ये किसे सुनाते।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ४०३ } {Nov 2012}






फ़ासलों के इस दौर में बढ रही हैं अब दूरियाँ
वरक भी न भर सके दिल में बसी वो खाइयाँ
संगदिल हैं सभी यहाँ और खून सर्द बर्फ़ सा
प्यासी रह गईं हैं दिल की बेचैन उदासियाँ।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल