कोई नही जो दिल की धडकन मन की आशा समझे
मैने पर्वत जिनको बनाया, मुझको वो माशा समझे
हर महफ़िल में खुशियाँ दी है मैंने इस दुनिया को
पर मुझको दुनिया वाले केवल एक तमाशा समझे।।
हर दिशा के हाथ में पत्थर सजे हैं छोटे बडे
एक सुन्दर काँच का घर है हमारी ज़िन्दगी
हो रहा सिन्धु-मंथन, है कहाँ अमृत घडा
देव-असुरों का समर है अब हमारी ज़िन्दगी।।