Saturday, June 8, 2013

{ ५९३ } {June 2013}





आज चहुँ दिशाओं में ये कैसा हो रहा तमाशा
पहले बेधते हृदय को फ़िर देते झूठी दिलासा
कहते मन-हृदय सब तो कर दिया तेरे नाम
पर सत्य ये कि ये मात्र मुख शोभा की भाषा।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ५९२ } {June 2013}





ये कैसा नशा आँखों में छा गया
हरतरफ़ तुम नज़र आने लगे हो।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ५९१ } {June 2013}





जमाना ढूँढता है जिसे दुनिया की भीड - भाड में
मेरे दिल में बसा गई है वो मोहब्बत की हकीकत।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ५९० } {June 2013}





उनको देख कर यही सोंचता रह जाता हूँ
कि रश्क में अपने भी दुश्मन हो जाते हैं।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ५८९ } {June 2013}





नाराज हो कर माशूक कभी दिल को तडपाता है
फ़िर हो के खुश आशिक के पहलू में आ जाता है
खुद को इन नजरों से छुपाना छोड रूबरू हो कर
वो मौसमे-वस्ल में प्यार के गीत गुनगुनाता है।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ५८८ } {June 2013}





काश हम न साथ-साथ चलते
बीच राह में न यूँ हाथ मलते
डालियों पर उगे खार हो तुम
कलियों सँग छुप कर पलते।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ५८७ ) {June 2013}





सुकूँ के नाम पर हर दम गदर की बात करते हैं
बन्द मुँह खुलता जब भी जहर सी बात करते हैं
बता के हमें अपना मसीहा-ए-ज़िन्दगी बन बैठे
अब हुआ जाहिर वो किस कदर की बात करते हैं।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल