Friday, November 16, 2012

{ ४०२ } {Nov 2012}





जाने कहाँ गया वो जालिम तन्हाई का जहर पिला
हमदम की पा कर एक झलक मन का तार हिला
कैसे बीत गये दिन बचपन के सपने बुनते-बुनते
दिल के तपते सहरा में खुश यादों का फ़ूल खिला।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

Wednesday, November 14, 2012

{ ४०१ } {Nov 2012}





मैं सहारा हूँ आदमियत का
आदमीयत मेरा सहारा है
समाज हो या सिया सत हो
आदमीयत हमारा नारा है।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

Monday, November 12, 2012

{ ४०० } {Nov 2012}





आँखों में आँसू लेकर रातें गुजारते हैं
सपनों में अब भी तुमकोपुकारते हैं
कभी सोचूँ तुमको पा लेंगें एक दिन
कभी अपनी भूलों को खुद सुधारते हैं।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल


{ ३९९ } {Nov 2012}





चाँद सा कभी तुम्हारा चेहरा लगे
कभी चाँद से भी दाग गहरा लगे
कभी गम से घिरे बादलों में मुझे
दर्द का बहता आँसू सुनहरा लगे।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ३९८ } {Nov 2012}





जाने क्या मन कहने को तडपा करता है
तेरी यादों में जाने क्यों भटका करता है
अपनी आँखों में ही छुपा रखा है तुमको
बन्द पलकों मे दिल सिसका करता है।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल


{ ३९७ } {Nov 2012}





तुम बिन सब सूना-सूना, लफ़्ज़ भी हैं बिखरे-बिखरे
लाओ कोई प्यार का मरहम, जख्म भी हैं उभरे-उभरे
तेरे प्यार की मधुर धुन को, हम कब से तरस रहे हैं
मधुर गीत बना उनको, जो पल साथ-साथ हैं गुजरे।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

Sunday, November 11, 2012

{ ३९६ } {Nov 2012}





मँजिलें भी ले रहीं हैं अब गजब का इम्तिहाँ
बेल-बूटे-शजर भी न छोडे रास्ते के दर्मियाँ
दिलों के राज भी अब कैद सी महसूस करते
खनक रही हैं इस लिये लबों की खामोंशियाँ।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल