कुछ तो हो अब ऐसा कि जीने की चाह निकले
कहीं से तो बेपनाह मोहब्बत की राह निकले
इतनी बडी है कायनात, इतना बडा जमाना
शिकस्ता-दिलों का कोई तो खैरख्वाह निकले।।
समझ आता नहीं सवाल तेरे बेवफा होने का
दिखता नहीं जवाज दिल-शिकस्ता होने का
फिर सोचता हूँ कि तुझे पाया ही कब था मैंने
जो हो मेरे दिल में एहसास तुझे खो देने का||