Saturday, December 22, 2012

{ ४१३ } {Dec 2012}





हिन्द की सेवा से मतलब था उसी से काम था
उसी धुन मे मगन, हर वक्त, सुबहो-शाम था
मैदाने सियासत का था मर्द कभी डरता न था
संसार में गूँजता "शेरे-हिन्द" उसका नाम था।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

Friday, December 21, 2012

{ ४१२ } {Dec 2012}






ज़िन्दगी के वास्ते कुछ ख्वाहिशें तो थीं मगर
रेत का दरिया हमारे ख्वाबों में शामिल न था
डूब ही गया होता अगर जरा घबरा गया होता
मैं था वहाँ दूर तक दिखता जहाँ साहिल न था।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ४११ } {Dec 2012}





बह उठी दरिया की मौंजें, आँख में उफ़ना समन्दर
कुछ आँसू बह चले हैं, कुछ ठहरे पलकों के अन्दर
हो गये हो तुम दूर जब से छाया भी न पा सके हम
साथ अश्कों ने दिया तब हर डगर हर रहगुजर पर।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ४१० } {Dec 2012}





मन के मौसम में, दिल की धडकन ने
जब-जब सुख सपनो के फ़ूल खिलाये
अनगिन चित्र बने मन के चित्रपटल पे
लब पे मुस्कानों सँग नैना भर-भर आये।।

-- गोपाल कॄष्ण शुक्ल

{ ४०९ } {Dec 2012}





एक दीप और जले।
चीर अँधकार उजास भर चले।।

भावना निराश हो नहीं
कामना हताश हो नहीं
हृदय उदास हो नहीं
शिथिल प्रयास हो नहीं।।

तूफ़ान में दीप जले।
एक दीप और जले।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ४०८ } {Dec 2012}





रोज ही होती यहाँगैरतों की मलामत
निकल जाओ बेदाग यही है गनीमत
दबा है ईमान चाँदी के जूतों के नीचे
फ़कत बेईमानों की ऊंची हुई कीमत।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ४०७ } {Dec 2012}





अभिनन्दन दीपमालिके !!

आशा विश्वासवती हो
साधना सुहागवती हो
साधक को सह सिद्धि दे
जगमग ज्योतित सुमालिके

अभिनन्दन दीपमालिके !!

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल