Sunday, April 7, 2013

{ ५१७ } {April 2013}






अब न वह रँग है, न रौनक है,
अब न रही भीड-भाड यारों की
मेरे सपनों का शहर अब जैसे
एक बस्ती हो गम के मारों की।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

Saturday, April 6, 2013

{ ५१६ } {April 2013}





दूर से देखे चँदा, चुरा चकोर दिल
जाने न वो कोई उसी का गाफ़िल
शामों-सहर की आहें तकदीर बनीं
हिज्र की बेताबियाँ हुईं मुस्तकिल।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ५१५ } {April 2013}





लक्ष्य तुम्हारा, पंथ तुम्हारा
प्रगतिपूर्ण यह कदम तुम्हारे
तब किस को दोष दोगे बोलो
जीवन-पथ पर तुम यदि हारे।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ५१४ } {April 2013}





धडकनों में तुमको संजोये हम
हर साँस में तुमको पिरोये हम
तुम जो आये थे रात सपनों में
नींद तो आई मगर न सोये हम।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ५१३ } {April 2013}





तैर रही नयनों में बिखरी परछाइयाँ
डूब गई सासों में छितरी गहराइयाँ
पीने को आँसू बचे खाने को है गम
सूखे हुए है चमन उजडी अमराइयाँ।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

Friday, April 5, 2013

{ ५१२ } {April 2013}





शहीद चँद्रशेषर आजाद के बलिदान दिवस पर कोटि-कोटि नमन....

युगपुरुष तपस्वी ईश वरदान आजाद चँद्रशेषर
स्वतंत्र भारत के स्वाभिमान आजाद चँद्रशेषर
झँझा, आँधी, गरजता तूफ़ान आजाद चँद्रशेषर
गिरि महासागर सदृश महान आजाद चँद्रशेषर
प्राणाहुति देश हित निष्काम आजाद चँद्रशेषर
है कोटि-कोटि तुमको प्रणाम आजाद चँद्रशेषर।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ५११ } {April 2013}





दिखे जब नभ में वो बादल सुहाने
लिख दिये मैनें प्यार के नये तराने
पाँव की पायल कह रही सब कहानी
चमके बिजली मुस्कुराहट के बहाने।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल