Wednesday, June 5, 2013

{ ५८६ } {June 2013}





रोटियों के वास्ते रोता है आदमी
रोटियाँ देख कर गाता है आदमी
बेबसी की बैसाखी को थामे हुए
हर मुश्किल सह जाता है आदमी।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ५८५ } {June 2013}





आप लाख दिलदार बना करें
पर हुस्न होता बडा दगाबाज है।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ५८४ } {June 2013}





ग्यान और धर्म का बाजार नर्म है
बुद्धि सर्द हो गई और पँगु कर्म है
कथन और क्रिया में तलाक हुआ
अर्थ ही समर्थ व्यर्थ कर्म-धर्म है।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

Tuesday, June 4, 2013

{ ५८३ } {June 2013}





होंगीं रँगीनियाँ खिल उठेंगी बहारें ज़िन्दगी में आपके
मुझे अपने दिल में बसा के, प्यार मुझको अता करें।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

Monday, June 3, 2013

{ ५८२ } {June 2013}





मँजरियों की यादे उमड-घुमड झूल रहीं झूले पर
भूल गये हो तुम लेकिन हम कब भूले इसे मगर
नयनों से वर्षा की बौछारें निश दिन झरती रहती
मुस्कानों की लिये पालकी कब से तक रही डगर।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ५८१ } {June 2013}





लाज से मुंद-मुंद जाते है नयना
खिलखिला रही दिल की दुनिया
रुख पे ढुलके आँसू लगते बोसा
मँद - मँद मुस्कुरा रही कल्पना।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ५८० } {June 2013}





हे भगवन ! तेरी दुनिया में ये क्या हो रहा है?
तेरी सौगात ज़िन्दगी को मानुस बस ढो रहा है।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल