Wednesday, October 17, 2012

{ ३८५ } {Oct 2012}






औरों की बात छोडिये यहाँ अपने ही अपने नही हुए
क्या नाम दूँ उन्हे जो सबके हुए, पर अपने नही हुए
शायद मेरे बुरे वक्त का ही सुबूत है जो दे रहे हैं वो
हैरत यही कसौटी पर परखते रहे पर अपने नही हुए।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ३८४ } {Oct 2012}





दूरियों का कभी कोई गम न करना
अपना जज्बा कभी कम न करना
दूर करने की कोशिश लोग करेंगें
पर रिश्तों पर कभी वहम न करना।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ३८३ } {Oct 2012}





राहे-हयात की तारीकियाँ मिटाने को
हम इश्क के गीत गुनगुनाते जायेंगें
मोहब्बत में करेंगे जान तक कुर्बान
वफ़ा-ए-गुल से इश्के-चमन सजायेंगें।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

Sunday, September 30, 2012

{ ३८२ } {Sept 2012}





राह जीवन की कठिन खारजारों से भरी है
दुख-दर्द की डालियाँ भी अभी तक हरी हैं
बन के लौ दिये की तमस से मैं लड रहा हूँ
अँधड-आँधियाँ-अँधेरों की लगी सरसरी है।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ३८१ } {Sept 2012}





जब-जब अरमानों के सपने
आशाओं के लेकर मुस्काए
नींद चुरा ली तब उसने मेरी
जब-जब मुझसे मिलने आए।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ३८० } {Sept 2012}






मेरे अधरों की पगडंडी, कभी चरण हँसी के चूम न पाई
मेरी मादकता मादक बनकर अपने मद में झूम न पाई
फ़ट जात उर मुखर वेदना से जब आँसू का उपहार मिले
श्वासों की उर्मि शैय्या पर जब न मुझको प्यार मिले।।


--- गोपाल कृष्ण शुक्ल

{ ३७९ } {Sept 2012}






हाले-दिल हमसे कहो गम घट जायेगा
साथ ले लो हमे ये सफ़र कट जायेगा
गर जिद पर अपनी ही टिके रहोगे तुम
राहे-जीस्त खाराजारों से पट जायेगा।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल