पल्लव
Friday, February 27, 2015
{ ८७० } {Feb 2015}
इनायत समझ कर अब तक तुझे जीता रहा हूँ
ऐ ज़िन्दगी ! तू फ़र्ज़ है ऐसे ही जिए जाऊँगा मैं।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
Saturday, January 31, 2015
{ ८६९ } {Jan 2015}
न होता ये जोशे-मोहब्बत, ये रँगीन चाहत
अगर तुम सी दीवानी पास हमारे न होती।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{ ८६८ } {Jan 2015}
गीत गाती हो जब भी तुम तो
हर साज भीग-भीग जाता है
जाने क्यों तुम्हारे नगमों में
समाया दुख-दर्द का नाता है।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{ ८६७ } {Jan 2015}
जो अक्स दिल में उतार सकूँ कहीं वो सूरत तो मिले
जानता हूँ ज़िन्दगी की हर ख्वाहिश पूरी नहीं होती।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{ ८६६ } {Jan 2015}
आज सँवरे तो कल बिखर जाये
खुशबुओं की तरह निखर जाये
दिल की बस इतनी ही दास्तान है
कभी दरिया चढ़े कभी उतर जाये।।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
Friday, January 30, 2015
{ ८६५ } {Jan 2015}
गुलशन में होते हैं काँटे भी अपना दामन बचा कर चल
फ़ूलों की ज़ुस्तज़ू में खारों से उलझना अच्छा तो नहीं।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
{ ८६४ } {Jan 2015}
तोड़ ही दिया जब अरमानों से भरा दिल
अब ज़ख्म को सहलाने से क्या फ़ायदा।
-- गोपाल कृष्ण शुक्ल
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