Thursday, February 28, 2013

{ ५०३ } {Feb 2013}





उठ रही आँधियाँ मन में छा गया गहरा अँधेरा
यादों के घने बादलों ने हम को हर जगह घेरा
रात सा दिन हुआ, गम की रजनी और काली
लगता है अब न होगा इस निशा का फ़िर सबेरा।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

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