Friday, April 10, 2015

{८८१} {Feb 2015}





उस हमनशीं की याद में शबोरोज़ ये आँखें बरसती हैं
पर वो ज़ालिम न ही मुझे याद करता न पास बुलाता है।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

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