Thursday, April 19, 2012

{ २४३ } {April 2012}





जख्मों पर शब्दों का मरहम
टूटे तारों से बजता सरगम
कैसे सुने प्यार की रुनझुन
रूठा हो जब प्यारा हमदम।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

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